शिमला 02 दिसंबर – ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरूद्ध सिंह ने आज मशोबरा के हिप्पा फेयरलॉन में हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों में सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला के समापन समारोह में मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों के सुदृढ़ीकरण एवं पंचायत क्षेत्र के विकास में आ रही दिक्कतों को मद्देनजर रखते हुए ग्रामीण विकास विभाग नईं कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान तक प्रदेश के विभिन्न विकास खंडों में निर्माण कार्यों के लिए पिछले काफी समय से स्वीकृत राशि किन्हीं वजहों से लंबित है जिसकी भविष्य में भी व्यय की संभावना कम है उस राशि को डायवर्ट कर अन्य योजनाओं पर व्यय करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों के अधीन बहुत से निर्माण कार्य ऐसे हैं जो एफआरए की क्लीयरेंस न होने की वजह से रूके पड़े है।

उन्होंने कहा कि एफआरए की नोटिफिकेशन में स्पष्टता न होने के कारण सड़क के कार्यों में देरी हो रही हैं। उन्होंने एफआरए नोटिफिकेशन की सपष्टता के लिए अतिरिक्त निदेशक एवं संयुक्त सचिव पंचायती राज नीरज चंदला की अध्यक्षता में राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों सहित एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए ताकि संशोधित एफआरए नोटिफिकेशन की जा सके।


उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहला ऐसा राज्य है जो विकास के क्षेत्र मे निरंतरता प्रदान करते हुए केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं की शत प्रतिशत राशि को व्यय करने में पूरे देश में अव्वल है। योजनाओं के क्रियान्वयन एवं राशि व्यय करने में सभी विभागों एवं पंचायती राज प्रतिनिधियों का भरपूर सहयोग रहता है।


अनीरूध सिंह ने सभी प्रतिभागियों को सतत विकास के सभी नौ बिंदुओं पर ग्राम पंचायत स्तर पर कार्य करने एवं इनके लक्ष्यों को निर्धारित समय सीमा पर हासिल करने के लिए आवाहन किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित चर्चा की गई सभी नौ थीम्स का सम्पूर्ण प्रदेश में स्थानीयकरण करना है ताकि हिमाचल प्रदेश को देश का एक अग्रणी राज्य बनाया जा सके।


कार्यशाला के दौरान कैबिनेट मंत्री ने उपस्थित विभाग अधिकारियों एवं पंचायती राज प्रतिनिधियों के साथ संवाद भी किया और उनकी समस्याओं को भी सुनी।

अतिरिक्त निदेशक एवं संयुक्त सचिव पंचायती राज नीरज चंदला ने मुख्यातिथि का स्वागत करते कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण एवं अंतरविभागीय अभिसरण करना है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में लगभग नौ बिंदुओं पर चर्चा की गई जिसमें गरीबी मुक्त और आजीविका उन्नत गांव, स्वस्थ गांव, बाल मैत्री गांव, जल पर्याप्त गांव, स्वच्छ और हरा भरा गांव, आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा युक्त गांव, सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव, सुशासित गांव व महिला सहयोगी गांव पर चर्चा शामिल है।

इस अवसर पर निशा सिंह, महा निदेशक एवं अध्यक्ष क्षमता वर्धन एवं प्रशिक्षण हिमाचल प्रदेश सरकार सहित 19 विभिन्न विभागों के अधिकारी, जिसमे मुख्य चिकित्सा अधिकारी, वन अधिकारी, परियोजना अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, जिला पंचायत अधिकारी, स्कूल प्राधाचार्य, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं बाल विकास अधिकारी, अध्यक्ष जिला परिषद, अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पंचायत समिति, ग्राम पंचायत प्रधान उपस्थित रहे।

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