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बाल हितों के संरक्षण के लिए सामुहिक प्रयासों की जरूरत: एडीसी

धर्मशाला, 12 दिसम्बर। बाल हितों के संरक्षण को लेकर विभिन्न विभागों और समाज के सभी घटकों को सामुहिक रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है। डीआरडीए सभागार धर्मशाला में आज सोमवार को बाल संरक्षण समिति की बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त कांगड़ा गंधर्वा राठौड़ ने यह शब्द कहे। बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीसी ने कहा कि देश और समाज का भविष्य बाल विकास पर निर्भर है, इसलिए बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी को गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसी के दृष्टिगत सरकार ने बालिका सुरक्षा योजना चलाई है। अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि योजना के तहत जिले में 168 बच्चे लाभ उठा रहे हैं।

एडीसी ने कहा कि बाल हितों को ध्यान में रखते हुए उनके संरक्षण में अधिकारियों को व्यक्तिगत संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, श्रम, कौशल विकास के अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों ने बाल संरक्षण संबंधित अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने अपने अपने विभाग से सम्बंधित योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा अनाथ एवं बेसहारा बच्चों तक पहुंचाने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि बच्चों एवं किशोरों के प्रति बुरे बर्ताव और शोषण से उनकी रक्षा करने के लिए दृढ़तापूर्वक अपनी सामाजिक-नैतिक जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ किसी भी तरह का यौन उत्पीड़न पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फरॉम सेक्सुअल ऑफेंस) एक्ट के दायरे में आता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा मामला ध्यान में आने पर तुरन्त पुलिस को सूचना दें।


संवैधानिक अधिकारों की अनुपालना हो सुनिश्चित

उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में बच्चों को अनेक अधिकार प्रदान किये गये है तथा इन अधिकारों की पूर्ण अनुपालना सुनिश्चित बनाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि संविधान में शिक्षा का अधिकार तथा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत प्रदान अधिकारों के प्रति अधिकारियों को विशेष निगरानी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार एक्ट के तहत 14 वर्ष तक आयु के बच्चों को शिक्षा प्रदान करना अनिवार्य बनाया गया है तथा इस एक्ट के तहत बनाए गये नियमों की पूर्ण अनुपालना सुनिश्चित करवाने के लिए उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये।


भिक्षावृति पर लगे रोक

एडीसी ने कहा कि क्षेत्र में भिखारियों की बढ़ती हुई संख्या के मामलें सामने आना भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि भिक्षावृति से बाल जीवन तो बर्बाद होता ही है, साथ ही बच्चों के भविष्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने प्रशासन तथा पुलिस विभाग को नियमित तौर पर चेकिंग करने व ऐसी गतिविधियों पर तुरन्त रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने मन्दिर परिसरों व मैक्लोडगंज क्षेत्र के आस पास भीख न मांगने वाले होर्डिग्सं लगाने के भी निर्देश दिये। उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों को बच्चों के साथ सद्भावपूर्ण व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।

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