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पत्रकार बुद्धिजीवी वर्ग है, जो निष्पक्ष व निडर होकर अपनी बात कह सकते है-संजय स्वरूप

सहायक आयुक्त उपायुक्त सोलन संजय कुमार स्वरूप ने कहा कि पत्रकार बुद्धिजीवि वर्ग है, जो निष्पक्ष व निडर होकर अपनी बात कह सकते है। संजय स्वरूप आज यहां राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर चिल्ड्रन पार्क सोलन स्थित प्रेस रूम में उपस्थित पत्रकारांे को सम्बोधित कर रहे थे। इस वर्ष भारतीय प्रेस परिषद के सुझाव पर ‘राष्ट्र निर्माण में मीडिया की भूमिका’ विषय पर पूरे देश के साथ-साथ सोलन ज़िला के पत्रकारों द्वारा भी सारगर्भित विचार-विमर्श किया गया। संजय स्वरूप ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में पत्रकारिता की हमेशा से ही अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व बुद्धिजीवियों द्वारा देशप्रेम पर लिखे गए लेख, कविताएं व कहानियों के कारण ही पूरे देश में आज़ादी की लहर जागी व देश प्रेम की भावना बढ़ी। इन बुद्धिजीवि पत्रकारों द्वारा ही पूरे देश में आज़ादी की अलख जगाई गई व आज़ादी की ओर एक बहुत महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया।


सहायक आयुक्त ने कहा कि आज के समय में पत्रकारिता की भूमिका राष्ट्र निर्माण में ओर भी अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि समाज की कुरीतियों को खत्म करने में मीडिया सहायक सिद्ध हुई है और आशा जताई की आगे भी ऐसे ही मीडिया आमजन का ज्ञानवर्धक बनेगी। वरिष्ठ पत्रकार सुशील शर्मा ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में मीडिया की भूमिका का प्राय साकारात्मक पत्रकारिता से है। उन्होंने उपस्थित सभी पत्रकारजनों से कहा कि अपनी पत्रकारिता में विकासात्मक पहलुओं को जोड़े ताकि पाठकों को देश में हो रहे विकासात्मक कार्यों के बारे में पता चले और वे इसका लाभ ले सकें। कार्यक्रम के मुख्यवक्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार संजय हिन्दवान ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत भारत में पत्रकारिता की जाती है। उन्होंने उपस्थित सभी पत्रकारजनों से कहा कि मीडिया का पहला दायित्व संविधान है। पत्रकारों को संविधान के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने पत्रकारिता का वर्चस्व बनाए रखने पर बल दिया।


कार्यक्रम के वक्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार र्कीति कौशल ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए सर्वप्रथम एक अच्छे इंसान बनने की जरूरत है। लोकतंत्र और मीडिया एक सिक्के के दो पहलु है। आमजन की सुविधा के लिए लोकतंत्र और मीडिया को साथ चलना आवश्यक है। उन्होंने पत्रकारिता के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि देश में 1780 में पत्रकारिता व 1927 में रेडियो आए। उन्होंने कहा कि आज के समय में 500 सेटेलाईट, 70 हजार प्रिंट मीडिया तथा 100 मिलियन लोग समाचार पत्रों को पढ़ते है तथा इन सैकड़ों लोगों तक सकारात्मक व सही समाचार पहुंचाने की जिम्मेदारी पत्रकारों की है।  


कार्यक्रम के वक्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार सुखदर्शन सिंह ठाकुर ने कहा कि अनादिकाल में पत्रकारिता का उदगम नारद मुनि से हुआ है, जिन्होंने सम्वाद का एक माध्यम बनाया जिससे तीनो लोको में वार्तालाप का सेतु बना रहा। उन्होंने कहा कि मीडिया राष्ट्र और समाज की आंख, कान व मुंह का माध्यम है, जिससे आमजन की समस्याएं और कठिनाइयां सरकार तक पहुंचती है।
कार्यक्रम के वक्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीदत्त शर्मा ने कहा कि मीडिया तंत्र जितना सक्षम होगा उतना ही देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चैथा स्तम्भ माना जाता है और इस स्तम्भ को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

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