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दाड़लाघाट में जलागम विकास परियोजनाओं के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक आयोजित

नाबार्ड राज्य क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी अधिकारी एवं महाप्रबंधक डा. सुधांशु   केके मिश्रा ने गत दिवस कौशल उद्यमिता विकास संस्थान दाड़लाघाट में सोलन जिला में नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित जलागम परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
उन्होंने कहा कि नाबार्ड द्वारा कुनिहार विकास खंड में अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन के माध्यम से 07 जलागम परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस्पर पंचकुला के माध्यम से 2 परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। इनमें 4 परियोजनाओं में अंबुजा सीमेंट व 01 में अल्ट्राटेक सीमेंट की सीएसआर सहभागिता है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनों का क्रियान्वयन जलागम विकास समितियों के माध्यम से किया जाता है। उन्होंने कहा कि जलागम विकास परियोजना का मुख्य उद्देश्य मृदा व जल संरक्षण, सिंचाई के लिए जल की बेहतर उपलब्धता तथा किसानांे को बेहतर कृषि तकनीकों की तरफ आकर्षित करना है।
उन्होंने इस्पर, अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन व जलागम समितियों के कार्यों की सराहना करते हुए क्रियान्वयन में और तेजी लाने निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को मधुमक्खी पालन, डेयरी आदि को अपनाने के सुझाव दिये। उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन व नर्सरी स्थापना पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। अच्छी नर्सरियों से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी अपितु बीज व पौध के लिए भी अन्य स्त्रोतों पर निर्भरता कम होगी। उन्होंने जलागम समिति के सदस्यों को सभी वाटरशेड में नर्सरी स्थापना करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने क्षेत्र की विशेषताओं व परंपरागत रूप से की जा रही फसलों के बीजों, स्थानीय अनार (दाडु) इत्यादि को भी संरक्षित करने की जरूरत है। इस दिशा में जलागम समितियों द्वारा स्थापित किए गए लघु बीज बैंक की उन्होंने सराहना की।
बैठक में क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में चल रही इन परियोजनों की विस्तृत जानकारी व अद्यतन प्रगति के बारे में अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन से क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबन्धक संजय शर्मा व कार्यक्रम प्रबन्धक भूपिंदर गांधी व इस्पर से राजिन्दर खासा द्वारा अवगत करवाया गया।
बैठक में नाबार्ड महाप्रबंधक डा. बीआर प्रेमी ने कार्यान्वयन संस्थाओं को परियोजना क्रियान्वयन से संबन्धित दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कृषि में सूचना प्रौद्योगिकी के प्रयोग के लिए विशिष्ट संस्थानों जैसे आईआईटी मंडी से सामंजस्य स्थापना पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वाटरशेड क्रियान्वयन में नाबार्ड की भागीदार सभी एजेंसियों को नियमित अंतराल पर अनुभव साझा करते रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत किसान कृषि के साथ-साथ बागवानी को विशेष रूप से अपना रहे हैं। सेब, प्लम, खुमानी, पपीते, मशरूम इत्यादि की खेती करने से किसानों को बेहतर आय होने लगी है। इनके अंतर्गत कुल 10 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में गतिविधियां की जा रही हैं जिनसे लगभग 90 गांवों के 5600 से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
समीक्षा बैठक के उपरांत पाटी बड़ोग जलागम परियोजना व कंधर जलागम परियोजना का भी दौरा किया गया तथा इनमें किए जा रहे कार्यों का जायजा लिया गया। प्रभारी अधिकारी द्वारा इस अवसर पर कौशल उद्यमिता विकास संस्थान द्वारा नाबार्ड व अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन के सीएसआर से चलाये जा रहे जीएसटी टैलि प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया गया।
जिला विकास प्रबन्धक नाबार्ड अशोक चैहान सहित नाबार्ड के अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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