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एचआइवी व्यक्ति एआरटी दवाइयों से बिता सकता है लंबा स्वस्थ जीवन: डॉ.निपुण जिंदल

धर्मशाला, 01 दिसम्बर: जिलाधीश कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल की अध्यक्षता में आज उपायुक्त कार्यालय के सभागार में विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष्य पर अंतर्विभागीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र में इस वर्ष हाई लेवल समिट में 2030 तक एचआईवी एड्स के उन्मूलन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
  उपायुक्त ने बताया कि इस बार के विश्व एड्स दिवस का नारा है ‘‘असमानता को खत्म करें, महामारियों को खत्म करें’’। आमदनी की असमानता, लैंगिक भेदभाव भी एचआईवी एड्स को प्रभावित करती हैं। कलंक और भेदभाव इसे और भी भयावह समस्या बना देते हैं। असमानता को दूर करना एचआईवी और कोविड-19 और भविष्य की महामारियों से लड़ने के लिए आवश्यक है। जब समाज में असमानता होती है-महामारी फैलती है। उन्होंने बताया कि 40 वर्ष के एचआईवी के अनुभव से हमने बहुत कुछ सीखा है। जहां शुरू में इसे एक लाइलाज बीमारी व निश्चित मृत्यू माना था अब एआरटी दवाइयों से एचआइवी व्यक्ति लंबा स्वस्थ जीवन बिता सकते हैं।
  उन्होंने बताया कि एचआईवी केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं बल्कि एक सामाजिक समस्या है। एक महीने तक चलने वाले इस एचआईवी एड्स अभियान में सभी विभाग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। एचआईवी को मुख्यधारा में लाने के लिए नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने 15 मंत्रालयों से एमओयू किए हैं जिसके अंतर्गत इन मंत्रालयों में एचआईवी की रोकथाम के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
  इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के लिए सुविधाएं, उपचार व एचआईवी की रोकथाम के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि जहाँ स्वास्थ्य विभाग अपने रेड रिबन क्लब कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं में जागरूकता को बढ़ाने के लिए प्रयासरत है वही युवाओं में जिम्मेदार विकल्प को बढ़ावा देने के लिए पीयर एजुकेटर के लिए जीवन कौशल की कार्यशाला आयोजित की जाती हैं। एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ना एचआईवी रोकथाम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  डॉ. गुप्ता ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में आईसीटीसी केंद्रों में मुफ्त व गोपनीय जांच की सुविधा राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पपरोला, सिविल अस्पताल पालमपुर, सिविल अस्पताल देहरा, सिविल अस्पताल नूरपुर, सिविल अस्पताल कांगड़ा, जोनल अस्पताल धर्मशाला व मेडिकल कॉलेज टांडा में उपलब्ध है।
  इस अवसर पर चर्चा में जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने स्पष्ट किया कि अब एचआईवी संक्रमण में पहले से काफी कमी आई है पर यह कमी अभी भी 2030 तक एचआईवी उन्मूलन के लक्ष्य से काफी दूर है। उन्होंने जानकारी दी कि यूएन एड्स की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष विश्व में 15 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हुए जबकि पूरी दुनिया में 3.77 करोड़ लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं वहीं एआरटी दवाई के कारण एचआईवी से होने वाली मृत्यु दर में काफी कमी आई है।
  डॉ.सूद ने बताया कि भारत में 23.50 लाख लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं और प्रतिवर्ष नए संक्रमण सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 4752 व्यक्ति एचआईवी के साथ जी रहे हैं जिसमें से जिला कांगड़ा के 1249 लोग हैं। हर मिनट हम बहुमूल्य जीवन एचआईवी के कारण खो रहे हैं।
  नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2020 सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में केवल 41 प्रतिशत पुरुषों व 36 प्रतिशत महिलाओं को इस बीमारी के बारे में संपूर्ण जानकारी है जोकि राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। भारत में 31 प्रतिशत पुरुष व 22 प्रतिशत महिलाओं को एचआईवी एड्स के विषय में सम्पूर्ण जानकारी है। अभी भी काफी लोगों में गलत भ्रांतियां है जिन को दूर करने के लिए अभी भी प्रयास करने जरूरी हैं। एचआईवी पर जानकारी के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था द्वारा टोल फ्री नंबर 1097 की सुविधा भी उपलब्ध है वही नैको (नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन) मोबाइल ऐप पर विस्तृत जानकारी भी ली जा सकती है।
  डॉ.सूद ने बताया कि सुई से नशा करने वालों में एचआईवी का खतरा 35 गुना होता है, ट्रांसजेंडर लोगों में 34 गुना एचआईवी संक्रमण का खतरा रहता है, वही कमर्शियल सेक्स वर्कर्स में यह खतरा 25 गुना अधिक रहता है। महामारी की रोकथाम के लिए कमजोर तबकों के बचाव के लिए हमें विशेष ध्यान देना पड़ेगा।
  डॉ.सूद ने कहा कि समुदाय की भागीदारी ने एचआईवी एड्स की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। इसी प्रकार कोविड-19 में समुदाय, विशेषतः कमजोर समुदाय की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है। सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम कमजोर व हाशिये पर चल रहे व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं वह महामारियो को रोकने में महत्वपूर्ण हैं। एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा मैं जोड़ना एचआईवी रोकथाम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्तियों के संगठन ‘‘जिंदगी जिंदाबाद’’ से श्रेष्ठा देवी ने बताया की बच्चों को सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता मिलती है जिससे उनके सुनहरे भविष्य को मदद मिलती है। वहीं उन्होंने विभिन्न प्रकार की चुनौतियों के बारे में भी चर्चा की।
  एचआईवी से जुड़े भेदभाव की रोकथाम के लिए एचआईवी एड्स एक्ट के अंतर्गत प्रावधान किए गए हैं जिसमें गोपनीयता सुनिश्चित करना, एचआईवी की जानकारी उपलब्ध कराना, एचआईवी के साथ जी रहे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा प्रमुख है। डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस ऑथोरिटी एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध करवाती है।
  रेड रिबन एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के लिए हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। सभी प्रतिभागियों ने इस अवसर पर रेड रिबन लगा कर अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई।
  इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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